पनिका समाज की ST सूची में बहाली की मांग को बस्तर महाराज का समर्थन, रायपुर की बैठक में होंगे शामिल
जगदलपुर। पनिका समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में दोबारा शामिल करने की मांग को लेकर बस्तर के महाराज कमलचंद्र भंजदेव ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने समाज के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि बस्तर दशहरा उत्सव के बाद रायपुर में आयोजित सामाजिक बैठक में वे स्वयं शामिल होंगे। बैठक में समाज की मांग और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को समझने के बाद संबंधित प्राधिकारियों से चर्चा करने की बात भी कही है।
10 अक्टूबर को बस्तर पैलेस में हुई मुलाकात
पनिका समाज के प्रतिनिधिमंडल ने 10 अक्टूबर को जगदलपुर स्थित बस्तर पैलेस में महाराज कमलचंद्र भंजदेव से मुलाकात की। यह मुलाकात काछनगुड़ी में काछन देवी से बस्तर दशहरा आयोजन की अनुमति लेने की पारंपरिक रस्म के बाद हुई।
प्रतिनिधिमंडल ने समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में पुनर्बहाली की मांग और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराया। इस पर महाराज ने समाज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर राजपरिवार का पनिका समाज के साथ लंबे समय से संबंध रहा है।
रायपुर की बैठक में शामिल होने का दिया आश्वासन
पनिका समाज के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. फूलदास महंत ने महाराज के सामने समाज की मांग रखी। इस पर कमलचंद्र भंजदेव ने सुझाव दिया कि बस्तर दशहरा उत्सव के बाद रायपुर में सामाजिक बैठक आयोजित की जाए।
उन्होंने बैठक में शामिल होकर समाज की बात और उपलब्ध तथ्यों को समझने तथा इसके बाद संबंधित प्राधिकारियों से चर्चा करने का आश्वासन दिया। समाज इस पहल को अपनी मांग को संबंधित स्तर पर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मान रहा है।
बस्तर दशहरा से जुड़ी है पनिका समाज की परंपरा
बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाला विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव है। इसकी विभिन्न रस्मों में अलग-अलग समुदायों की भूमिका रही है। काछनगादी की परंपरा में पनिका समाज की कन्या की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
समाज के प्रतिनिधियों ने इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव सहित अन्य तथ्यों को महाराज के सामने रखा। वर्तमान बस्तर दशहरा को इस परंपरा का 608वां वर्ष बताया जा रहा है।
संवैधानिक प्रक्रिया से ही होगा पुनर्बहाली पर फैसला
पनिका समाज की अनुसूचित जनजाति सूची में पुनर्बहाली की मांग के बीच यह स्पष्ट है कि किसी समुदाय को ST सूची में शामिल करने या पुनः शामिल करने का निर्णय निर्धारित संवैधानिक और विधिक प्रक्रिया के तहत होता है। बस्तर महाराज की ओर से दिया गया आश्वासन संबंधित पक्षों के बीच संवाद की पहल है, न कि पुनर्बहाली के संबंध में अंतिम निर्णय।
समाज को उम्मीद है कि प्रस्तावित रायपुर बैठक में ऐतिहासिक तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों पर चर्चा के बाद आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी जा सकेगी।
प्रतिनिधिमंडल में ये पदाधिकारी रहे शामिल
बस्तर महाराज से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में पनिका समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. देवधर महंत, वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. फूलदास महंत, कोरबा सांसद के प्रतिनिधि पोषक महंत और डॉ. बरसाइतदास महंत शामिल थे।
अब बस्तर दशहरा उत्सव के बाद प्रस्तावित रायपुर बैठक पर समाज की नजरें टिकी हैं। बैठक में समाज की मांग, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों पर आगे चर्चा होने की उम्मीद है।
